Tuesday, December 24, 2019

2 दिन से लापता युवक । परिजनों का आरोप कोई बहला फुसलाकर ले गया होगा


2 दिन से लापता युवक । परिजनों का आरोप कोई बहला फुसलाकर ले गया होगा 
सतना नागौद थाना व उपथाना  पोंडी क्षेत्र के कुलगढी से  14 वर्षीय युवक 2 दिनों से लापता है
युवक का नाम शशिकांत गौतम पिता कृष्णकांत गौतम जो कक्षा 10 में पढ़ रहा था बताया गया कि 22 दिगम्बर को रोज की तरह वह सुबह 7 बजे घर से कुलगढ़ी में शिक्षक धर्मेंद्र गुप्ता के यहां ट्यूशन पढ़ने के लिये गया हुआ था  लेकिन दोपहर  तक घर नही पहुंचा परिवार जनों द्वारा पता किया गया तो वह ट्यूशन पढ़ने गया ही नही जब परिजनों द्वारा आसपास पूंछताछ की गई तो श्यामनगर से सतना चलने वाली महरानी ट्रेवल्स की बस में कुलगढ़ी में बैठा था  तब परिजनों द्वारा सतना व रिस्तेदारी में सभी जगह पता किया गया पर कही भी पता नही चला तो थाने में चाचा शिवाकांत गौतम द्वारा गुमशुदी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है । आज देर शाम नागौद पुलिस  पहुची  परिवार जनों का कहना है कि कोई बहला फुसलाकर कर ले गया होगा । 
अधिक जानकारी के लिए परिजनों का सम्पर्क no - 7389664988



Saturday, December 21, 2019

देवीशरण सिंह ग्रामीण की पूण्य तिथि पर स्मरण - आज भी नही भूलते श्री ग्रामीण जी के साथ बीते दिन


देवीशरण सिंह ग्रामीण की पूण्य तिथि पर स्मरण

आज भी नही भूलते श्री ग्रामीण जी के साथ बीते दिन

बाबूलाल दाहिया

       समय कितना जल्दी निकल जाता है कि  मालूम ही नही पड़ता?
             आज सुबह जैसे ही मोबाइल खोला तो पिछले वर्ष आज के ही दिन  का श्री ग्रामीण जी पर लिखा मेरे पोते अनुपम का  लेख उनके चित्रों के साथ दिख पड़ा। और  सहजता सरलता किन्तु  स्वाभिमान से लबरेज ग्रामीण जी की याद ताजी हो गई । फिर तो श्री ग्रामीण जी के साथ बिताए पुराने दिन चल चित्र की तरह ह्रदय तल पर उतरना स्वाभाविक थे।
       क्योंकि हमें याद रहे न रहे पर सभी के हाथों में सुशोभित यह मोबाइल सब कुछ याद दिला देता है। 
         श्री ग्रामीण जी से मेरी पहली भेट  शायद 1969, 70,में हुई थी जब वे श्री त्रिभुवन सिह जी ऐडबोकेट के साथ हमारे गाँव आये हुए थे और  स्कूल में काव्यपाठ किये थे।
               पर मेरा बिधिवत परिचय 1982 में रहिकवारा कवि सम्मेलन से  हुआ।फिर तो पिथौराबाद के कवि सम्मेलन में हम लोग हर साल उन्हें बुलाने लगेे।और उनके आग्रह पर मैं भी गोष्ठिओ एवं पाठक मंच के कार्यक्रमो में नागौद आने लगा था। फिर तो उनकी लाटा धूल शिल्पी आदि कविताए लोगो के मन मे ऐसी बसी कि जब कभी ग्रामीण जी आते तो जिन्हें उनका नाम याद न होता तो कहने लगते
 ,,आज लाटा वाले कवि जी आए है?,,

          ग्रामीण जी का साथ मिला तो श्री कालिका त्रिपाठी, डा, कैलास तिवारी रामलाल सिह जी ,बालेंदु मिश्र, रमाकांत मिश्र, अरुण नामदेव अजीतसिंह कुँवर आदि साहित्यकारों की एक मंडली ही मिल गई  कुछ दिनों बाद डा, सेवाराम त्रिपाठी जी के आने से नागौद की साहित्यिक गतिविधियों को और ऊँचाई मिली।
        फिर शुरू हुवा भृमण तो भोपाल इंदौर गुना मंदसौर सागर जबलपुर चंडीगढ़ गोदरिगवां आदि न जाने कहा कहा प्रलेस एवं हिंदी साहित्य सम्मेलन व कवि सम्मेलनों में मुझे ग्रामीण जी के साथ जाने का अवसर मिला।
 1976 के चित्रकूट कहानी रचना शिविर और 77 के कोरवा नाट्य रचना शिविर में तो हम लोग पूरे 10,,10 दिनो तक साथ साथ ही रहे।
         ग्रामीण जी की सादगी सहजता को  हमारे साहित्यकार किस प्रकार उपयोग कर लेते थे? मुझे अबतक एक वाकया याद है।
        दर असल चित्रकूट रचना शिविर में हम लोगो को कहानी लेखन का प्रशिक्षण देने डा, काशीनाथ सिंह जी आए हुए थे और उन्हें शाम के समय दारू चाहिए थी। पर तीर्थ स्थल होने के कारण शाम को दूकान बन्द हो चुकी थी। 
      आखिर साथियो ने तरकीब निकालीऔर टहलने के बहाने ग्रामीण जी को वहां तक ला सड़क में खड़े कर  दूकानदार के निवास में जाकर उससे कहा कि 
          भैया यह कुर्ता धोती धारी छतीशगढ़ के बिधायक है जो बिना दारू  एक दिन भी नही रह सकते। इसलिए किसी तरह एक बोतल का प्रबंध कर दो । 
         और फिर हूं ब हूं कुर्ता जाकेट में बिधायक से दिख रहे ग्रामीण जी को दूकानदार कैसे निराश कर सकता था ?
    यह अलग बात है ग्रामीण जी को इस योजना का पता तक न चल पाया हो।
इसी तरह गुना में तो कुछ साहित्यकारों ने पीने के बाद एक खाली बोतल चुप चाप ग्रामीण जी के बैग में ही छिपा दिया । ताकि घर मे उन्हें भाभी जी द्वारा डॉट मिले कि अच्छा तो अब यह भी पीने लगे।
   वे देखने मे सहज सचमुच के ग्रामीण किन्तु बिचारो से उतने ही परिपक्व। जब गोर्बाचोव ने रूस की नीति को परिवर्तित किया तो उनके पेरास्तोयिका ग्लास्तनोत पर सतना में एक संगोष्टी थी।
             बाकी साहित्यकार जहां गोर्बाचोव की प्रसंशा कर रहे थे वही ग्रामीण जी ने अपने अलग तर्क रखते हुए कहा था कि गोर्बाचोव का यह कदम तीसरी दुनिया के देशों के लिए न सिर्फ घातकसिद्ध होगा बल्कि अमरीका को निरंकुश  भी बना देगा।

       ऐसे सहज  सरल किन्तु प्रतिबद्धऔर देश के तमाम साहित्य करो के चहेते थे अपने ग्रामीण जी। पर अब तो उनकी स्मृति ही शेष है।

आज उनकी पूण्य तिथि पर मैं उन्हें सादर नमन करता हूं।🙏🙏




Thursday, December 19, 2019

दुनिया की अनोखी बीमारी जिंदगी और मौत से जूझ रही बच्ची मदद की दरकार

दुनिया की अनोखी बीमारी  जिंदगी और मौत से जूझ रही बच्ची मदद की दरकार

Tuesday, December 17, 2019

दाहिया दहायत संग़ठन सतना द्वारा जाति प्रमाण पत्र की समस्या को लेकर सतना कलेक्टर को सौपा ज्ञापन

मध्यप्रदेश दाहिया दहायत  समाज महासंघ सतना द्वारा अनूसूचित जाति का प्रमाण पत्र न बनाये जाने के विरोध में आज सतना कलेक्टर को ज्ञापन सौपा ।  
जिलाध्यक्ष राजेन्द्र दाहिया ने बताया गया कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा सन् 2000 में अनुसंधान शाखा द्वारा मानव शास्त्रीय नृजातीय अध्ययन किया जा चुका है । जिसका निष्कर्ष यह है कि रीवा संभाग अंतर्गत निवासरत कोटवार जाति के लोग ही मूलतः दहायत जाति के लोग हैं और अनु.जाति की सूची के सरल क्रमांक 18 पर दहायत के साथ दाहिया को भी 2014 में जोड़ा गया है । व वर्तमान में पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्रालय एवं सामान्य प्रशासन के पोर्टल से भी 26 नवम्बर 2019 को कोटवार (पद सूचक ) शब्द को विलोपित किया जा चुका है । उसी आधार पर रीवा शहडोल एवं अन्य जिलों में दाहिया दहायत  को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है परंतु सतना जिले में प्रमाण पत्र ना बनाकर लाखों परिवार के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है जिसके चलते हजारों छात्र छात्राओं का छात्रवृत्ति का फॉर्म नहीं भरने से परीक्षा से वंचित हो  जाएंगे और उनका पूरा साल बर्बाद हो जाएगा ज्ञापन देकर एक सप्ताह का समय मांगा गया  है इस दौरान यदि प्रगति नही होती है तो छात्र-छात्राओं तथा पदाधिकारियों द्वारा आमरण अनशन किया जाएगा ज्ञापन सौंपने में प्रदेश अध्यक्ष अनिल दाहिया संभागीय अध्यक्ष कृष्णपाल दाहिया ,रामकरण दाहिया रेरुआ ,बद्री दाहिया, अनुपम दाहिया पिथौराबाद,रामदीन दाहिया,पुष्पेंद्र दाहिया, शिवप्रसाद दाहिया, स्वामीदीन दाहिया फुटौधा,प्रदीप दाहिया डुड़हा,सचिन दाहिया,प्रेम दाहिया, राकेश दाहिया
सहित समस्त पदाधिकारी व सैकड़ों स्वाजातीय लोग उपस्थित रहे।







बिजली तारों के रूप में झूल रही मौत ग्रामीणों को दुर्घटना हाेने की सता रही चिंता


बिजली तारों के रूप में झूल रही मौत

ग्रामीणों को दुर्घटना हाेने की सता रही चिंता
जिले में हुए तमाम हादसों के बावजूद बिजली विभाग ने न तो सबक लिया है न ही दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रयास कर रहा हा जिसका ताजा उदाहरण ऊँचेहरा विद्युत मंडल क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मैनहा में बस्ती के बीच एक सप्ताह पहले चली तेज हवा  और पानी के चलते 11 हजार केवहीँ की बिजली की तार इंसुलेटर से टूट कर जमीन के करीब झूल रही है । और गाव में बिजली भी चालू है जिसकी सूचना ग्रामीणों द्वारा ऊँचेहरा जेई व यहां के लाइनमैन हरीश श्रीवास्तव को दी गई थी पर आज तक लाइन काे दुरुस्त नहीं किया।बस्ती में सड़क के करीब  झूल रही यह 11 हजार केवी की लाइन से कभी भी बड़ा हादसा हाे सकता है। यहां ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि  इसके अलावा भी गाव मे कई जगह तार जमीन से महज 3 से 4 फीट पर ही झूल रहे हैं। जिसकी कई बार माैखिक व लिखित शिकायत की है लेकिन सुनवाई नहीं हुई। 

Monday, December 16, 2019

ग्रामीण जी की स्मृति में साहित्यिक गोष्ठी व कवि सम्मेलन का आयोजन


ग्रामीण जी की स्मृति में साहित्यिक गोष्ठी व कवि सम्मेलन का आयोजन

 साहित्य जगत में अपना विशिष्ठ स्थान व अमिट छाप रखने वाले जन- जन के चहेते वरिष्ठ साहित्यकार स्व.श्री देवीशरण सिंह "ग्रामीण" की स्मृति में आगामी 22 दिसम्बर को नागौद के समीप उनके ग्रह ग्राम बाबुपुर में एक साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जिसमे विन्ध्य क्षेत्र के अनेक रचनाकार शामिल होंगे।
          उनके बेटे श्री पुष्कर शरण सिंह ने बताया कि उनकी प्रथम वार्षिक अनुपस्थिति के यादगार में दो सत्र में एक साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन होगा। जिसमे सुबह के सत्र में,,ग्रामीण जी के साहित्य में उनके जीवन मूल्यों और संघर्षों का प्रभाव,, पर एक गोष्ठी रखी गई है और दूसरे सत्र में एक कवि सम्मेलन का आयोजन जिसमे विन्ध्य अंचल के अनेक ख्यातिलब्ध रचनाकार सामिल होंगे। इन दोनों सत्र के कार्यक्रम हेतु डा.दिनेश कुशवाहा ,डा. सेवाराम त्रिपाठी रीवा ,पद्मश्री बाबूलाल दाहिया पिथौराबाद, श्री संतोष खरे सतना डा.विवेक द्विवेदी ,डा कैलाश तिवारी रीवा, रामलाल सिंह परिहार ,बालेंदु मिश्र, शैलेन्द्र सिह शैल नागौद रमेश सिह जाखी ,अजीत सिंह कुँवर,रामयश बागरी ,रविशंकर चतुर्वेदी, तेजभान सिंह तेज समेत विन्ध्य क्षेत्र के अनेक साहित्यकार,व साहित्य प्रेमी, बुद्धिजीवी अपनी सहभागिता देंगे।

परसमनिया पठार के गुढ़ा की बेटी अपर्णा बनी असिस्टेंट प्रोफेसर


परसमनिया पठार के गुढ़ा की बेटी अपर्णा बनी असिस्टेंट प्रोफेसर