Thursday, December 5, 2019

40 सालों से पुराने सिक्कों, नोटों और डाक टिकट का संग्रह कर रहा एक शख़्स

40 सालों से पुराने सिक्कों, नोटों और डाक टिकट का संग्रह कर रहा एक शख़्स

अनुपम दाहिया

सतना, प्रदेश के एक शख्स को पुराने सिक्कों, नोटों एवं डाक टिकटों का संग्रह करने का ऐसा जूनून है कि वह पिछले 40 सालों से यह काम कर रहा है। उसके संग्रह को देखकर लोग हैरान और दंग रह जाते हैं। उसके पास कई देशों के विभिन्न प्रकार के सिक्कों, नोटों एवं डाक टिकटों का एक अच्छा खासा संग्रह तैयार हो चुका है।

दरअसल सतना के सुभाष पार्क निवासी 58 वर्षीय राजेन्द्र अग्रवाल की पुराने सिक्कों, नोटों एवं डाक टिकटों का संग्रह करने में खासी दिलचस्पी है। राजेन्द्र 18 साल की उम्र से कलेक्शन कर रहे हैं। पिछले 40 सालों में राजेन्द्र ने अपने घर में ही मिनी संग्रहालय तैयार कर लिया है। जहां यह सब दुर्लभ चीजे संग्रहीत है। हालाँकि राजेन्द्र का जुनून अभी भी खत्म नहीं हुआ है। उनकी इच्छा है कि पूरी दुनिया के सिक्कों का संग्रह उनके पास हो।

राजेन्द्र घर के पास ही मेडिकल की दुकान पर व्यवसाय के साथ अपना शौक भी पूरा कर रहे है। उन्हें इस अनोखे कार्य के लिए देश की विभिन्न संस्थानों द्वारा कई बार सम्मानित किया जा चुका है। वह समय-समय पर प्रदर्शनियों में जाकर अपने संग्रह का प्रदर्शन भी करते हैं।

राजेन्द्र बताते हैं कि जब वह 18 साल के थे तब उनके पिताजी अग्रवाल समाज के जन्म स्थली गोहा जो हरियाणा में है से लगभग 200 वर्ष पुराने 80 सिक्के लाये थे। राजेन्द्र ने जब उन सिक्को को देखा तो उन्हें भी सिक्कों व नोट के संग्रह का ख्याल आया। धीरे-धीरे उनका वह संग्रह करते रहे और आज उनके पास अच्छा ख़ासा संग्रह हो गया है। उनके पास मुगलकालीन से लेकर कई राजघरानो के सिक्कों का अनूठा संग्रह है। किस सल्तनत के दौर में किस तरह के सिक्के चलन में थे। यह सब भी इनके संग्रह में देखे जा सकते हैं।

अलग-अलग कालखंड में विभिन्न प्रकार के जारी किये गये सिक्को की श्रृंखला में अधिकांश सिक्के इनके संग्रह में सम्मिलित है। इस संग्रह में रीवा व ग्वालियर राज घराने द्वारा चलाए गए सिक्को, मुगलकालीन सिक्कों एवं अंगेजो के जमाने के सिक्कों का संग्रह में समावेश है। इन सिक्कों में कुछ सिक्के अत्यंत पुराने एवं अन्य देशों के भी है। यदि इन के द्वारा संग्रहित सिक्कों का वजन किया जाए तो वह लगभग एक क्विंटल से अधिक ही होंगे।

राजेंद्र के पास तमाम ऐसे नोटो का जखीरा भी है जो अपने आप मे अद्भुत है। इनके पास दिनांक के 1, 2, 5, 10, 20, 50, 100 व 500 रुपये के पुराने नोट भी मौजूद हैं। वे उस जखीरे से अपने चहेते मित्रो को उनके जन्म दिवस के दिनांक वाली नोट खोज कर उपहार तक में देते है। राजेन्द्र को नोटो की पहचान का इतना अनुभव हो गया है कि वे नोट को कुछ सेकंड हाथ में लेकर ही पहचान जाते है कि उपरोक्त नोट की किस जगह छपाई की गई है।

राजेन्द्र के इस जुनून में उनके परिवार के सदस्य, मित्र और रिश्तेदार भरपूर सहयोग करते हैं। अगर किसी को भी कही कोई अलग तरह के नोट या सिक्के दिखते है तो उसे लेकर इनके पास पहुँचते हैं। राजेन्द्र के संग्रहण का शौक अब उनके बेटे अग्रज अग्रवाल को भी लग चुका है। वह भी इस शौक में उनका हाथ बटाता है। मेडिकल स्टोर में रहते समय उसकी नजर भी उन अनोखी नोटो की तरफ बनी रहती है।

राजेन्द्र के पास ऐसे भी दर्जनों मिस प्रिन्ट वाले नोट है जिसमे दोनों तरफ एक ही प्रिंट, क्रीजिंग त्रुटि, गहरी स्याही प्रिंट, सिक्योरटी थ्रेड में त्रुटि, एक ही तरफ छपाई, ज्यादा बड़े पेपर, एक ही नोट में डबल छपाई व कई बिना सीरियल नम्बर के नोट भी है। उन्होंने बताया कि ऐसा करोड़ों की छपाई में कभी एकाध बार ही होता है। फिर मिस प्रिंट वाले नोट की छटनी होती है और उसके बाद ही बाजार में आता है। इससे गलती की गुंजाइश नहीं के बराबर होती है। इस तरह के दुर्लभतम और गलत छपाई वाले नोट की बहुत मांग होती हैं। हम संकलनकर्ताओ को ऐसे अवसर का बेसब्री से इंतजार होता हैं। संग्रह में ये कोई साधारण नोट नहीं हैं। बल्कि यह एक असाधारण और बड़े लोगों की दिलचस्पी वाले नोट होते है।

सिक्कों और नोट के अलावा राजेन्द्र पुरानी दुर्लभ डाक टिकट के कलेक्शन का कार्य भी करते हैं। डाक टिकट के संग्रह पर राजेन्द्र ने बताया कि हर डाक-टिकट किसी न किसी विषय की जानकारी देता है। उसके पीछे कोई न कोई इतिहास जरूर छुपा होता है। अगर हम इस छुपी हुई कहानी को खोज सकें तो यह हमारे सामने ज्ञान की रहस्यमयी दुनिया का नया पन्ना खोल देता है। जिसके द्वारा हम अनेक देशों के इतिहास, भूगोल, संस्कृति, ऐतिहासिक घटनाएँ, भाषाएँ, मुद्राएँ, पशु-पक्षी, वनस्पतियों और लोगों की जीवनशैली एवं देश के महानुभावों के बारे में बहुत सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Wednesday, December 4, 2019

एसपी साहब यहां भी है हैदराबाद जैसे हैवान , इनकी कब होगी गिरफ्तारी ?



एसपी साहब यहां भी है हैदराबाद जैसे हैवान ,  इनकी कब होगी गिरफ्तारी ?

18 वर्षीय दलित दाहिया परिवार की लड़की से दबंग लड़के ने किया था, दो महीने बाद भी कोई गिरफ्तारी नही परिजनों का आरोप राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस  ठोस कार्यवाही नही कर रही
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सतना  । ऊँचेहरा थाना क्षेत्र के रगला गाव में एक मामला सामने आया है, जिसमे बलात्कार करने के बाद आरोपी दरिन्दे खुले आम घूम रहे हैं दरिंदों की शिकार पीड़िता युवती न्याय की आस में दर-दर भटकने को मजबूर है, और उसकी फ़रियाद सुनने वाला कोई नहीं है।

        इस मामले में पीड़िता ने बताया  कि घटना के दो महीने पूरे होने को हैं, पर अभी तक कोई पकड़ा नहीं गया। दबंगों ने उसके परिवार का निकलना बंद करवा रखा है उन्होंने राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस द्वारा सही कार्यवाही न करने का आरोप लगाया है l उनके अनुसार आरोपीगण राजनीतिक पार्टी से हुड हुए है इसलिए उन पर ठोस कार्यवाही नहीं की जा रही है l इस मामले में पीड़िता व उसका परिवार एसपी ऑफिस व कई जनप्रतिनिधियों  तक का चक्कर लगा चुकी है लेकिन अभी तक उसे न्याय नही मिला

यह है पूरा मामला
विगत 15 अक्टूबर 2019 की  रगला गाव में एक 18 वर्षीय दलित दाहिया परिवार की युवती ने गाँव के ही एक दबंग युवक सिम्पू उर्फ लोकमन सिंह पिता वीरेंद्र परिहार पर बलात्कार का आरोप लगाया था।पीड़िता के अनुसार वह खेत मे दोपहर को करीब 1 बजे के लगभग खेत मे शौचालय के लिए गई हुई थी तभी आरोपी आ गया और मुंह दबाकर अरहर के खेत मे घसीटकर कर ले गया और उसके साथ जबरजस्ती बलात्कार किया और धमकी देते हुए कहा की जबान मत खोलना कुछ कर नहीं पाओगी। और किसी से बताया तो सब को मार दूंगा। इसके बाद घर पहुच पीड़िता ने परिजनों को बताया पर पर परिजनों ने दबंगो से डर के कारण शांत रहने को कह दिया जिस पर पीड़िता ने जहर पी लिया था तब आनन फानन में ऊँचेहरा अस्पताल में भर्ती किया गया जहां हालत बिगड़ने पर जिला असप्ताल रेफर कर दिया गया था। वहां पीड़िता ने चौकी में भी घटनाक्रम की जानकारी दी।

पीड़िता में हिम्मत और विश्वास कूट कूट कर भरा है
पीड़ित परिवार को लगातार जान से मारने की धमकी मिल रही है और सुलह-समझौता का दबाव डाला जा रहा है लेकिन पीड़िता में हिम्मत और आत्मविश्वास कूट-कूटकर भरा है। वो वो कहती है कि हम गरीब हैं, दलित हैं लेकिन लालची नहीं। कुछ ले देकर हम समझौता नहीं करेंगे हमें सिर्फ न्याय चाहिए। आरोपी जेल जाएं और उन्हें सजा मिले। जिससे मेरी तरह अन्य लड़कियो के साथ ऐसी घटना न हो सके।

Tuesday, December 3, 2019

आदिम संस्कृति एवं जीवन शैली को दर्शाने वाला एक जीवन्त संग्रहालय शिपग्राम में है।



शिल्पग्राम में आदिम संस्कृति एवं जीवन शैली को दर्शाने वाला एक जीवन्त संग्रहालय है। 

✍ अनुपम दाहिया
         
पिछले सप्ताह हम 5 दिन के लिए उदयपुर राजस्थान में गए थे यहां शहर के समीप ही शिल्पग्राम में ऑर्गेनिक फॉर्मर एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा 3 दिवसीय जैविक महोत्सव का आयोजन किया गया था जिसमें में 20 से अधिक राज्यो के कृषि वैज्ञानिक, किसान, देशी बीज सरक्षक , शोधकर्ता  सभी एक ही मंच पर जैविक खेती के विकास को लेकर एकत्रित हुए थे ।


      उदयपुर शहर से लगभग 5 किलोमीटर दूर  ग्रामीण शिल्प एवं लोक कला परिसर शिल्पग्राम स्थित है। लगभग 2 किलोमीटर के दायरे में भूमि क्षेत्र में फैला तथा अरावली पर्वतमालाओं के मध्य में बना शिल्पग्राम पशिचम क्षेत्र के ग्रामीण तथा आदिम संस्कृति एवं जीवन शैली को दर्शाने वाला एक जीवन्त संग्रहालय है। इस परिसर में पारंपरिक वास्तु कला को दर्शाने वाली झोंपड़ियां निर्मित की गई जिनमे भारत के पश्चिमी क्षेत्र के पांच राज्यों के भौगोलिक वैविध्य एवं निवासियों के रहन-सहन को दर्शाया गया है।
इस परिसर में राजस्थान की सात झोपड़ियां है।  जिनका प्रतिरूप राजस्थान के रेगिस्तान में स्थित गांव रामा तथा सम से लिया गया है।व
मेवाड़ के पर्वतीय अंचल में रहने वाले कुंभकार की झोंपड़ी उदयपुर के 70 किमी दूर गांव ढोल से ली गई है। 
दो अन्य झोंपड़ियां दक्षिण राजस्थान की भील सहरिया आदिवासियों की है।  साथ ही गुजरात राज्य की भी प्रतिकात्मक 12 झोंपड़ियां हैं इसमें छ: कच्छ के बन्नी तथा भुजोड़ी गांव से ली गई है। 
इसी के समीप पशिचम गुजरात के छोटा  गुजरात के आदिम व कृषक समुदाय जनजाति राठवा और डांग की झोंपड़ियां अपने पारंपरिक वास्तु शिल्प एवं भित्ति अलंकरणों से पहचानी जा सकती है। इसके अतिरिक्त लकड़ी की बेहतरीन नक्काशी से तराशी पेठापुर हवेली गुजरात के गांधीनगर जिले की काष्ठ कला का बेजोड़ नमूना है।


परीक्षा सिर पर फार्म नही भर पाए हजारो छात्र



परीक्षा सिर पर फार्म नही भर पाए हजारो छात्र 

 अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय की परीक्षाएं 4 दिसम्बर से शुरू होने वाली है 
पर विडम्बना इस बात की है कि हजारों छात्र  छात्राओं ने अब तक परीक्षा फार्म ही नहीं भर पाए हैं और अगर कोई अब फार्म भरना चाहता है तो उसे   15सौ रुपए विलंब शुल्क देना पड़ेगा । दरअसल अब तक विश्वविद्यालय में ऐसे कई सैकड़ा प्रकरण लंबित पड़े हैं जिनमें छात्रों ने विषय परिवर्तन का आवेदन किया था । मगर प्रबंधन द्वारा उनके आवेदनों की अनदेखी 8के चलते आलम  है कि परीक्षा शुरू होने वाले है और विश्वविद्यालय द्वारा कोई भी उपाय नहीं ढूंढ सका है । कुल मिलाकर छात्रों को या तो परीक्षा से वंचित रहना पड़ेगा या फिर पास होने के लिए मजबूरन अनचाहे विषय की परीक्षा देनी होगी । ऐसे में वह छात्र कैसे आवेदन कर सकते हैं जो गरीब तबके से संबंध रखते और उनकी स्थिति दयनीय हैं । छात्रों के बताये अनुसार हर साल अपनाई जाने वाली विषय परिवर्तन प्रक्रिया को इस वर्ष लागू नहीं किया गया है । परीक्षा अब सिर्फ दो दिन बचे हैं और अब ऐसी स्थिति बनी हुई है ।

जिले के इन 15 कालेज में बनाये जायेगे परीक्षा केंद्र  

शुरू होने वाली सेमेस्टर परीक्षाओं के लिए विश्वविद्यालय द्वारा सतना में 15 परीक्षा केन्द्र बनाये जा रहे है जिनमे वाणिज्य महाविद्यालय ,
विंध्या कॉलेज करही रोड,सिंधु कन्या महाविद्यालय सतना ,श्री रामाकृष्णा कॉलेज  भरहुत नगर सतना , शासकीय इन्दिरा गांधी कन्या महाविद्यालय , जलद त्रिमूर्ति कालेज नागौद ,शारदा कालेज सरला नगर मैहर , विवेकानंद कालेज मैहर ,कालेज अमरपाटन , कालेज न्यू रामनगर , कालेज जैतवारा , स्वामी नीलकंठ कालेज मैहर , सीकैट कन्या कालेज मैहर , विंध्यांचल कालेज जिगना और कालेज रामपुर बघेलान  हैं ।

  

अवैध उत्खननक्रर्ता पर सतना कलेक्टर ने 21 लाख 82 हजार की लगाई पेनाल्टी



परसमनिया पठार के सखौहा में अवैध उत्खनन पर कलेक्टर ने 21 लाख 82 हजार की लगाई पेनाल्टी

सतना । उचेहरा तहसील के अंतर्गत परसमनिया पठारी क्षेत्र के ग्राम सखौहा में अवैध उत्खनन करने के मामले में राजेंद्र सिंह तनय राम स्वरुप सिंह गोंड के विरुद्ध खनिज विभाग द्वारा प्रस्तुत किये गए प्रकरण पर कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी सतेंद्र सिंह ने बड़ी कार्रवाई की है । अवैध उत्खननकर्ता राजेंद्र सिंह पर रायल्टी 30 गुना अर्थदंड अधिरोपित किया गया है । आरोपी के खिलाफ 21 लाख 82 हजार रुपए की पेनाल्टी लगाए जाने का आदेश पारित किया गया है ।  आरोपी राजेंद्र सिंह निवासी सखौहा खुर्द सखौहा की आराजी नंबर 11 रकबा .543 हेक्टेयर के अंश भाग में अवैध उत्खनन पत्थर निकाले थे । खनिज विभाग ने जांच पड़ताल कर प्रकरण तैयार किया था । कलेक्टर कोर्ट प्रस्तुत प्रकरण नंबर 67 / 2018 - 19 पर सुनवाई करते हुए कलेक्टर ने 72 हजार 733 रुपए की खनिज रायल्टी के मुकाबले तीस गुना अर्थ दंड अधिरोपित किये का आदेश दिया है ।
यहां दर्जनों वैध खदाने स्वीकृत हैं लेकिन उनके मुकाबले अवैध खदानें अधिक चल रही है जहां  व्यापक पैमाने में पत्थर पाटिया का उत्खनन किया जा रहा व वैध टीपी की आड़ में बाहर भेजा जाता है 


सतना जिले के ऊँचेहरा विकासखण्ड क्षेत्र के परसमनिया पशुचिकित्सालय का हाल जहा कई महीनों से लटक रहा ताला


कई महीनों से नही खुला परसमनिया का पशु चिकित्सालय का ताला
सतना ।
            ऊँचेहरा परसमनिया पठारी अंचल में कभी भी निगरानी व जांच न होने से भर्रेसाही व्याप्त है । यहां पहाड़ी अंचल के मध्य स्थित ग्राम पंचायत परसमनिया में बना शासकीय पशु चिकित्सालय का कई महीनों से ताला ही नही खुला है । ग्रामीणों ने बताया की यहां चिकित्सक के रूप में डॉ पुष्पराज सिंह पदस्थ है जो रीवा के रहने वाले है और तक वो कभी भी आये ही नही जबकि नियमानुसार प्रतिदिन  चिकित्सालय खुलने का समय सुबह 8 बजे से सायं से 6 बजे तक निर्धारित  है। स्थिति यह है कि क्षेत्र में दर्जनों पंचायतो के बीच यही एक मात्र शासकीय पशु चिकित्सालय है। आसपास गावो के ग्रामीण पशुपालक अपने बीमार पशुओं का इलाज करवाने के लिए आते है पर  पशु चिकित्सालय पर ताला लटका देख निराश होकर बीमार पशु को लेकर मजबूरी में वपिश या उपचार के लिए अन्यत्र व दूर दराज भटकना पड़ता है।


सतना बिरसिंहपुर में मोबाइल के टार्च के रोशनी में कर दिए 35 महिलाओं के नसबंदी ऑपरेशन

 

सतना जिले में स्वास्थ्य विभाग की जानलेवा लापरवाही का एक मामला सामने आया है।

मोबाइल के टार्च के रोशनी में कर दिए 35 महिलाओं के नसबंदी ऑपरेशन

        सतना । जिले में स्वास्थ्य विभाग की जानलेवा लापरवाही का एक मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र विरसिंहपुर में 30 नबम्बर शनिवार को  महिला नसबंदी शिविर का आयोजन किया गया था जिसमे 35 महिलाओं की नसबंदी किया जाना था। चिकित्सक ने प्रोटोकॉल को धता बता महिलाओं की जान जोखिम में डालकर टार्च की रोशनी में नसबंदी ऑपरेशन कर डाले । 
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल के सर्जिकल विशेषज्ञ डॉ . देवेंद्र सिंह को नसबंदी का जिम्मा सौंपा गया था लेकिन डॉ सिंह शिविर में नसबंदी ऑपरेशन करने शाम 5 बजे के बाद अस्पताल पहुंचे और ऑपरेशन भी शुरू हुआ तो अंधेरा होने के बाद और ओटी अंधेरे के चलते चिकित्सक ने टार्च मंगाई और मोबाइल टार्च की रोशनी के सहारे चिकित्सक ने अंधेरे में ही 35 नसबंदी ऑपरेशन कर दिए । 

महिलाओं के घरवालों परिजनों ने सीधे तौर आरोप लगाया है कि इलाज के बाद उन्हें ऑपरेशन कक्ष से वार्ड में ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक नहीं मुहैया कराया गया, जिसकी वजह से उनके परिजन उन्हें हाथों में उठाकर वहां से बाहर लाए और वार्ड में लेटाया। इतना ही नहीं इन महिलाओं के लेटने के लिए बेड की व्यवस्था तक नहीं की गई ठंड के इस मौसम में जमीन पर ही अंधेरे कमरों में ही दरी ,चादर बिछाकर जमीन पर लिटा दिया गया । जबकि नियमानुसार नसबंदी ऑपरेशन के बाद महिलाओं को ठंड और संक्रमण से बचाने के लिए बेड़ पर लेटाना जरूरी होता है इस तरह जमीन पर लेटाने से महिलाओं में संक्रमण होने का खतरा बढ़ सकता है।


बताया गया कि अस्पताल में ना तो पर्याप्त बेड थे ना ही कंबल और ना ही बिजली का सही इंतज़ाम अस्पताल में जनरेटर भी चालू हालत में नहीं था जबकि स्वास्थ्य महकमे के द्वारा शिविर के लिए अलग से बजट भी स्वीकृत किया गया है ।    सर्विस प्रोवाइडर ,हितग्राही को पीओएल घर से आने जाने ) ,रिफ्रेशमेंट और कैप मैनेजमेंट सहित के लिए राशि निर्धारित है,लेकिन इसके बाद प्राथमिक सुविधाओं तक उपलब्ध नहीं करायी जा रही।

घटना की जांच के लिए कलेक्टर ने गठित किया दल 
         कलेक्टर व जिला मजिस्ट्रेट डॉ. सतेंद्र सिंह द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिरसिंहपुर में टार्च की रोशनी में 30 नवंबर को नसबंदी ऑपरेशन करने की घटना की जांच के लिए दल गठित किया गया है। जांच दल में अपर कलेक्टर व अपर जिला मजिस्ट्रेट आईजे खलखो, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय आरख व लेप्रो स्कोपिक सर्जन सह-डीएचओ ,डॉ. चरण सिंह को शामिल किया गया है। जांच दल जांच कर मंगलवार तक प्रतिवेदन देगा। 
जिसमे  घटना की जांच के लिए बिंदु तय किए गए है। 
निर्धारित बिन्दुओं में जांच दल एलटीटी डयूटी रोस्टर व निर्धारित दिवसों के कैंप की सर्वसंबंधितों को सूचना आदेश, 
एलटीटी कैंप के प्रभारी आफीसर कौन थे व उनके द्वारा कैंप प्रारंभ से लेकर समाप्ति तक किए गए कार्यों की अभिलेख सूची,
 कैंप में कुल कितने हितग्राहियों को बुलाया गया था तथा भारत सरकार के निर्देशानुसार कैंप में क्या-क्या व्यवस्था होनी थी और क्या-क्या रही। 
इसके लिए प्रथम, द्वितीय व तृतीय मुख्य रूप से अधिकारी-कर्मचारी जवाबदेह थे। 
कैंप के लिए आपातकालीन क्या-क्या व्यवस्थाएं रखनी चाहिए व क्या-क्या रखी गई, 
स्वास्थ्य केंद्र में आपातकालीन व्यवस्था के लिए विद्युत व्यवस्था क्या-क्या थी, 
स्वास्थ्य केंद्र में जनरेटर अथवा इनवर्टर की वैकल्पिक व्यवस्था क्या थी, 
स्वास्थ्य केंद्र में एलटीटी कैंप के लिए कितने पलंग, गद्दे, चादर व अन्य की क्या व्यवस्था थी, 
किन परिस्थितियों में ऑपरेशन वाली महिलाओं को जमीन पर लिटाया गया, 
एलटीटी सर्जन व कैंप प्रभारी मेडिकल आफीसर एलटीटी कैंप में कब पहुंचना चाहिए और वह कब पहुंचे, कार्य का विवरण सहित,
 पिछले 2 माह में किन-किन अधिकारियों द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया गया और निरीक्षण के दौरान क्या-क्या पाया गया तथा उस पर क्या कार्रवाई हुई, 
सहित अन्य बिंदु जो जांच दल आवश्यक समझे शामिल है। बिंदुवार जांच कर प्रतिवेदन अभिमत सहित प्रस्तुत करने के निर्देश कलेक्टर डॉ. सिंह द्वारा दिए गए हैं।